हर ख़ुशी हर ग़म आजमाए हुए
मरहम लगाने का रिवाज़ कुछ ऐसा है

चले आते हैं लोग बिन बुलाए हुए
मेरे हो जाते हैं जो भी आते हैं यहाँ
सब हुनर उनके ही हैं सिखाये हुए
सिलवटें बिस्तर की देख सोचता हूँ
आयेंगे वो कभी बिन बताये हुए
ठगा सा लग रहा हूँ आज ऐसे
कुछ बच्चे हों जैसे फुसलाये हुए
सब्र कर ले कुछ तू ही सागर
लगते हैं लोग सब बौराए हुए
मेरे हो जाते हैं जो भी आते हैं यहाँ
ReplyDeleteसब हुनर उनके ही हैं सिखाये हुए
bahut achhe...ye tasveer haan aapne hi click ki hai na?
भई वाह...
ReplyDeletewaah bahut khubsurat
ReplyDeleteमेरे हो जाते हैं जो भी आते हैं यहाँ
सब हुनर उनके ही हैं सिखाये हुए
बेहतरीन!!
ReplyDeleteवर्ड वेरीफिकेशन हटा लें प्लीज, बस एक निवेदन है:
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?> इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
वो पल उनके साथ बिताये हुए
ReplyDeleteहर ख़ुशी हर ग़म आजमाए हुए
बहुत सुन्दर....
AApke hunar ki taarif mein ye chand shabd aapke liye ..............................
ReplyDeleteye likhne ka maada banaye hue jo aaye aapke pass unhe apna banaye hue......................bahut hi prasangik rachna hai bhai
मरहम लगाने का रिवाज़ कुछ ऐसा है
ReplyDeleteचले आते हैं लोग बिन बुलाए हुए
kya baat hai sagar bhai...behad khoobsurat gazal hui hai...saare sher kabile dad hai..dad kabool karen..
बहुत ही अपनी और नज़दीकी भावनाएँ होती हैं आपकी शशि...और उनको शब्दों में उतारने का आपका तरीका भी बहुत ही ख़ूबसूरत और ऑरिजिनल है..अपनी ऑरिजिनैलिटी इसी प्रकार बनाएँ रखें।
ReplyDeleteमरहम लगाने का रिवाज़ कुछ ऐसा है
ReplyDeleteचले आते हैं लोग बिन बुलाए हुए
sager sir aapke gazal bahut hee khoobsurat hai
मरहम लगाने का रिवाज़ कुछ ऐसा है
ReplyDeleteचले आते हैं लोग बिन बुलाए हुए
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haqeekat ko kitne sunder alfaajon me bayaan kar diya aapne...marhabaa.....khuda aapki qalam aur paini kare.......ameen......
aap sabhee doston ka bahut-bahut shukriyaa
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