हो रही थी बात |
वही खनकती आवाज,
वही सादगी आज भी |
दूर होते हुए भी हो रहा था,
आत्मीयता का आभास |
थोड़ी हडबडाहट थी उनमे,
जैसे पूछ लेना चाहती हो,

सबकुछ चंद समय में |
बड़ी ही उत्सुकता से बताया,
अपनी बच्ची नाम,
जो कि बिल्कुल वही था,
जिसकी कभी हम कल्पना करते थे |
बातों ही बातों में बनाते थे घर,
और रखते थे सबके नाम |
हंसते हुए बोल पडी,
कितना अच्छा है संयोग,
कि हो रही है आपसे बात |
मैंने पुछा, दुबारा...फिर...कब.......
आह भरती हुई कहती गयी,
हो जाया करेगा ऐसा ही संयोग |
खुश हूँ मैं भी इस संयोग पर,
लेकिन कहूँ क्या इसे,
प्रेम या पूर्वाग्रह .............|
aapki rachnaye dil ko chhoo leti hai...!
ReplyDeletebhai mazaa aa gaya....bahut achchha likhte hain aap
ReplyDeleteacchi rachanayen, aabhar
ReplyDeleteJis Kavi Ki Kalpana Mein
ReplyDeleteZindagi Ho Prem Geet
Us Kavi Ko Aaj Tum Nakaar Do :)..
mast hai chhote..lage raho
आपकी इस रचना को पढने का मौका मुझे पहले भी मिला था लेकिन इसे ब्लॉग पर पढ़ा और भी अच्छा लगा आपकी रचना वास्तव में दिल को छु जाती है और मैं तो व्यक्तिगत तौर पे कह सकता हूँ की मुझे आपके लिखे का इंतज़ार रहता है वाकई बहु खूब लिखा है आपने
ReplyDeleteतू किस्की बात कर रहा है मै समझ गया । बहुत ही अद्वतीय कविता लिखी है तूने..... बहुत खूबसूरत ढ़ग से तूने अपने बीते खयालों को शब्दों में उतारा है.... तुझसे यही उम्मीद थी... वास्त्विक संदर्भ में बस यही कहूँगा कि यह प्रेम व पूर्वागृह दोनों है ।
ReplyDeleteबहुत सुंदर ....!!
ReplyDeleteबहुत ही सलीके से आपने अपने दिल के ज़ज्बातों को शब्द रूप दिया ....बहुत खूब.....!!
never ever i met somebody whom i could say "you rock dude" you are the one
ReplyDeleteyeh wo prem hai jo purvagrah ka ahsas dela deti hai..................ya wo purvahgarh jo prem ki pooja se ban hai......... zindgi ki ek mod par dono ek dusare k sahare ho jate hai......
ReplyDeletedil ke ahsas ko aapne is tarah se bayan kiya hai ki padhkar koi bhi mantramugdh ho jaye. aapka rahul IAF
ReplyDeletetumhare chitron ka chayan be-mel hai.... jaan padta hai ki kitne kareeb hote ho tum apne vichaaron ke, jab kuchh likhte ho.....koi mahaul bana lete ho apne aas-paas...... main bahut prabhavit hoon.... koi to hai jo sachche mann se hindi ki seva kar raha hai...... tumhare doston mein hona garv ki baat hai.....
ReplyDeletebas itna kahungi ki shayad dil nikal kar rakh diya hai.....apki is saral shabdavali me bahut hi gahre vichar hain ,,,,once again HATS OFF TO YOU SIR......
ReplyDeletepyara ka hasaa...aur uspe judayee..bhaut sata jati hai tab ye yade aur yaad aati haijab achanak kabhi bat ho ya mulakat ho..hai na
ReplyDeleteprem aur purvagrah dono ek ahsas dela deti ki prem dard he dard hai..........
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